अलवर मे इन दिनों प्लाट की बिक्री तेज हो गयी है. Moti dungri से जेल के चौराहे तक करीब तीस से चालीस प्लाट की बिक्री हो रही है. कोरोना कल मे जब लॉक डाउन था तब बिना किसी जानकारी के प्लाट गुपचुप तरीके से बेचे गए. यहाँ पर प्लाट का साइज 600 से 700 वर्गगाज है जिसका कोरोना के समय 105000 प्रीति वर्गगज था जिसके मुताबिक रेट करीब सात करोड़ पचास लाख होता है
लेकिन इसमें रजिस्ट्री सर्किल रेट पर हुई है जो करीब एक करोड़ के आस पास है बाकि पैसा काले धन का है जिससे सरकार को रजिस्ट्री सर्किल रेट से कराने से राजस्व का नुकसान हो रहा है. इससे सरकार को स्टाम्प पेपर की क़म कीमत मिल रही है.सरकार मे कोई भी सरकार के राजस्व के नुकसान की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है. कोरोना के समय से करोडो के के राजस्व के नुकसान की भरपाई मुश्किल है. सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि राजस्व का नुकसान नहीं हो साथ ही काले धन के उपयोग से समाज एक गलत राहा पर जा रहा है. सरकार कठोर कदम उठा कर प्लाट बेचने वालो के खिलाफ इनकम टैक्स की पूछताछ करें और उनको टैक्स चौरी के नोटिस दे.वर्तमान मे प्लाट का रेट दो लाख पचास हजार रुपए प्रति वर्ग गज है
उन प्लाट मे बनाने मे करीब पांच करोड़ लगे है यह धन भी काला धन है लगता है इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सोया है वो इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा कृपया इस की तरफ ध्यान दे वरना टैक्स चोरी होती रहेगी तथा काला धन लोग प्रॉपर्टी खरीदने मे लगा देंगे
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