LIC REINSTAMENT AND TERMINATION RULE 2009


 




LIC AGENT REGULATION 2017



भारतीय जीवन बीमा एजेंट रेगुलेशन 2017 यहां आप के लिए है कृपया इसे देखे और संबंधित कमियों की शिकायत बीमा नियामक अभिकरण यानी IRDA मे करे ताकि जीवन बीमा निगम की एजेंट को गुलाम समझने की मानसिकता पर रोक लगे हम एजेंट भारतीय जीवन बीमा निगम के नौकर नही है । इस को अधिक से अधिक लोगों को शेयर करे ताकि जीवन बीमा निगम को एजेंट को गलत निगाह  से देखने पर दंड मिले 
जो मानसिकता अंग्रेज की थी वही मानसिकता भारतीय जीवन बीमा निगम की है यह निगम भूल कर भी यह गलती न करे नही तो एजेंट एक्शन लेंगे 
 







IRDAI APPOINTMENT OF AGENT RULE









 




Lic ciecular


 भारतीय जीवन बीमा निगम का सर्कुलर न Lic circular no CO/mktg/A/ZD/10/2018 यहाँ से डाउनलोड कर सकते है

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 पंजाब नेशनल हाउसिंग फाइनेंस ने अपने इन्वेस्टर के लिए फिक्स डिपाजिट की रेट की घोषणा की है जो कि बैंकों से काफी ज्यादा है और पंजाब नेशनल बैंक हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में इंटरेस्ट रेट आप अपनी फिक्स्ड डिपाजिट यह 12 महीने से लेकर 120 महीने तक की करा सकते हैं जिसमें 7.55 % है और .25% एक्स्ट्रा सीनियर सिटीजन के लिए है जिससे सीनियर सिटीजन को बढ़ावा मिले और वह अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट एटीएम माध्यम में करा सकें

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महात्मा गाँधी एक सोच

 सुनो!! कान खोलकर...।।


#मोहन पैदा हुआ था, मोहन ही मरा हूँ। #महात्मा तुम्हारे बापों और दादो ने जबरन बना दिया। मुझे ना मुझे महात्मा बनना था, न #राष्ट्रपिता, न #राष्ट्रपति, न #प्रधानमंत्री ..। हां, तुम्हारे बड़े बूढों ने जो प्यार दिया था। जब वो "#बापू" कहते तो बड़ा भला लगता। लगता.. सब मेरे बच्चे हैं, मेरी जिम्मेदारी। हैं। जब सारा देश ही बापू कहने लगा, तो किसी ने उत्साह में राष्ट्रपिता कह डाला। मगर मैं तो मोहन था, मोहन ही रहा। 


सुनो!! तुम्हारे बड़े बूढ़े मुझे नेता कहते थे। मगर मैने कोई चुनाव नही लड़ा, चुनावी तकरीर नही की। कोई वादा नही किया, कोई सब्सिडी नही बांटी। मैं तो घूमता था, दोनो हाथ पसारे..  मांगता था बस प्रेम, शांति और एकता। 

बहुतों ने दिया, तो कुछ ने इन बढ़े हुए हाथों को झटक भी दिया। उन्हें इस फकीर से डर लगता था। प्रेम से डर लगता था, शांति से डर लगता था.. एकता से डर लगता था। उन्होंने लोगो को समझाया- नफरत करो.. तुम एक नही हो, ना कभी हो सकते हो। शांति झूठी है। लड़ो, आगे बढ़ो। मार डालो। जीत जाओ।


सुनो!! वो जीत गए। मुझे मार डाला। और टुकड़े कर दिए ...हिन्दुओ के, मुसलमानों के, देश के.. दिलो के। और वो जीतते गए है। साल दर साल, इंच इंच, कतरा कतरा.. धर्म का नाम लेकर, जाति की बात करके, गौरव का नशा पिलाकर वो तुम्हे मदहोश करते गए। वो जीत गए। 


सुनो!! वो जीत गए.. मगर मैं नही हारा। मैं यहीं हूँ.. इस मिट्टी में घुला हुआ। वो रोज तुम्हे एक नया नशा देते है, और नशा फटते ही मैं याद आता हूँ। मैं तुम्हारी जागती आंखों का दुःस्वप्न हूँ। तुम हुंकार कर मुझे नकारते हो, उस नकार में ही स्वीकारते हो। तुम्हें यकीन ही नही होता कि मैं मर चुका हूँ, तो सहमकर फिर से गोलियां चलाते हो। आखिर हारकर  .. मेरी समाधि पर सर झुकाए खड़े हो जाते हो। 




सुनो ,कान खोलकर। न तो तुम्हारी इज्जत से महात्मा बना था, न तुम्हारी इज्जत से कोई महात्मा बन सकता है। असल तो ये है, जिसे तुम्हारी इज्जत हासिल हो.. वो महात्मा हो ही नही सकता।


तो कान खोल कर सुन लो। तुमको, और तुम्हारे बाप को पीले चावल भेजकर राजघाट नही बुलाता। श्रद्धा से भरी अंजुली न हो, तो श्रद्धांजली लेकर आना भी मत। मोहनदास करमचंद गांधी का नाम तुम्हारी इज्जत का मोहताज नही है।



" गांधी होने में 'एक 'उम्र' लगती है,


गोडसे तो 'एक 'पल' में हुआ जा सकता है...!!"


बापू के जन्मदिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन ।

🙏🙏🌹🌹





निशा सैनी की सराहनीय पहल

बिजलीघर चौराहे पर निशा होम केयर के बैनर तले चलने वाली प्याऊ  पर निर्जल एकादशी पर मिल्क रोज की सेवाए दिन भर चली बिजलीघर चौराहे पर निशा ...